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जापान और भारत के पारस्परिक संबंधों को व्यापक आधार देने में यह बैठक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी-जयवीर सिंह


 उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को नया आयाम देने पर व्यापक चर्चा की गई। इस सहयोग का फोकस वेलनेस टूरिज्म, खेल पर्यटन (विशेषकर गोल्फ), व्यंजन एवं खानपान का आदान-प्रदान, बौद्ध पर्यटन, सांस्कृतिक यात्रा तथा साहित्य और ज्ञान आधारित पर्यटन पर रहेगा। यह विमर्श यामानाशी प्रांत से आए जापानी प्रतिनिधिमंडल और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय बैठक के दौरान हुआ, जिसकी अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने की।

लखनऊ के एक स्थानीय होटल में बैठक के दौरान जयवीर सिंह ने कहा कि भारत और जापान के बीच संस्कृति एक ऐसा सेतु है, जो दोनों देशों को जोड़ता है। यह संबंध साझा जीवन मूल्यों, परंपराओं और बौद्ध विरासत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यटन और संस्कृति दीर्घकालिक तथा स्थायी साझेदारी की मजबूत नींव तैयार करते हैं।

मंत्री ने कहा कि जापान ने 1868 से अपने आधुनिक विकास की यात्रा शुरू की थी। आज भारत और उत्तर प्रदेश उस चरण में हैं, जहां सहयोग केवल व्यापार और निवेश तक सीमित न रहकर संस्कृति, अध्यात्म और जनसंपर्क तक विस्तारित हो सकता है। राज्य की बौद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए जयवीर सिंह ने कहा कि बिहार के बोधगया के अतिरिक्त, सारनाथ, कुशीनगर और कपिलवस्तु जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। यह प्रदेश विश्व का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां भगवान बुद्ध के जीवन के सभी प्रमुख चरण एक ही राज्य में समाहित हैं। बैठक में पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि अप्रैल या मई के आसपास जापान में यूपी फेस्टिवल के आयोजन की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह फेस्टिवल जापानी दर्शकों को उत्तर प्रदेश की संस्कृति, विरासत और पर्यटन क्षमता से परिचित कराने का प्रभावी मंच बन सकता है।

पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने जापान की जीवन-दर्शन परंपराओं का उल्लेख करते हुए ‘इकिगाई’, ‘वाबी-साबी’, ‘ज़ेन’ और ‘ज़ाज़ेन’ जैसी अवधारणाओं की चर्चा की। उन्होंने कहा कि दर्शन, वेलनेस और पर्यटन के क्षेत्र में आपसी आदान-प्रदान दोनों पक्षों के लिए समृद्ध अनुभव लेकर आ सकता है। सारनाथ और कुशीनगर में जापानी बौद्ध संस्थानों का होना भारत-जापान के बीच दशकों से चले आ रहे आध्यात्मिक संबंधों का प्रमाण है। उनके अनुसार, पर्यटन और संस्कृति को उत्तर प्रदेश-जापान संबंधों के स्थायी माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।

अमृत अभिजात ने होटल क्षेत्र से आगे बढ़कर व्यंजन आधारित अनुभव, खेल पर्यटन और लर्निंग टूरिज्म की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगरा, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों में गुणवत्तापूर्ण गोल्फ कोर्स उपलब्ध हैं, जो जापान की गोल्फ परंपरा को देखते हुए खेल पर्यटन में सहयोग के अवसर खोलते हैं। इसके साथ ही उन्होंने साहित्यिक आदान-प्रदान, चिकित्सा पर्यटन और व्यंजन आधारित यात्राओं की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। साथ ही, टूर ऑपरेटर्स से अपील की, कि वे जापानी पर्यटकों के लिए विशेष क्यूरेटेड टूर पैकेज विकसित करें।

यामानाशी प्रांत के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडेरा ने कहा, कि दिसंबर 2024 में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद से उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रांत के बीच सार्थक संवाद हुए हैं। यामानाशी प्रांत, जापान में उत्तर प्रदेश के लिए प्रवेश द्वार (गेटवे) के रूप में कार्य करने का लक्ष्य रखता है, जिससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ व्यापक सहयोग को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की प्रस्तावित जापान यात्रा एक महत्वपूर्ण अवसर होगी। अगस्त माह में 200 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश आएगा। जिसके माध्यम से व्यापार, वाणिज्य, पर्यटन और सांस्कृतिक सहयोग को और विस्तार मिलेगा। जुनिची इशिडेरा ने स्पष्ट किया कि जापानी प्रतिनिधिमंडल की वाराणसी सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की प्रस्तावित यात्रा धार्मिक महत्व तक सीमित न रहकर उनके नीतिगत और सांस्कृतिक महत्व पर भी जोर देगा।



बैठक में विशेष सचिव पर्यटन ईशा प्रिया ने उत्तर प्रदेश और जापान के बीच पर्यटन एवं सांस्कृतिक सहयोग की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद संस्कृति विभाग की अपर निदेशक डॉ. सृष्टि धवन ने भी प्रस्तुतीकरण दिया। कार्यक्रम में यामानाशी प्रांत के सलाहकार नीरेंद्र उपाध्याय, महानिदेशक पर्यटन डॉ. वेदपति मिश्रा, प्रबंध निदेशक यूपीएसटीडीसी आशीष कुमार, निदेशक इको पुष्प कुमार के०, उप निदेशक पर्यटन कीर्ति, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जापानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य तथा दोनों देशों के टूर और ट्रैवल ऑपरेटर्स उपस्थित रहे।


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