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डॉ. सुधांशु सिंह को कृषि अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का मान बढ़ाने के लिए मिला सम्मान


 उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि अनुसंधान, नवाचार और सतत खाद्य प्रणालियों के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले विख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु सिंह को प्रतिष्ठित 'उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान' से सम्मानित किया है। डॉ. सिंह ने वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान को उत्तर प्रदेश के किसानों की स्थानीय समस्याओं के समाधान में बदलकर राज्य को कृषि नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से विशेष रूप से धान आधारित फसल प्रणालियों में उत्पादकता, जलवायु सहनशीलता और स्थिरता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मान डॉ. सिंह द्वारा राज्य की वैश्विक प्रतिष्ठा को सशक्त करने और किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

डॉ. सुधांशु सिंह के नेतृत्व में वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (ISARC) उत्तर प्रदेश के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने जलवायु-स्मार्ट कृषि, डायरेक्ट-सीडेड राइस (DSR), तनाव-सहनीय फसल प्रौद्योगिकियों और कम-उत्सर्जन वाली खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान किया है। ये नवाचार राज्य में भूजल ह्रास, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती उत्पादन लागत जैसी गंभीर चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) की स्थापना में भी निर्णायक भूमिका निभाई, जिससे राज्य में फसल विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ संस्थागत संबंधों को नई मजबूती मिली है।

आजमगढ़ जनपद के ग्राम समेंदा के मूल निवासी डॉ. सुधांशु सिंह का शैक्षणिक और पेशेवर करियर अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (ANDUAT) से बी.एससी. और एम.एससी. में स्वर्ण पदक प्राप्त किए और फिलीपींस स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान (IRRI) से अपनी पीएच.डी. पूर्ण की। तीन दशकों से अधिक के अनुभव के साथ डॉ. सिंह वर्तमान में ISARC के निदेशक के रूप में एशिया और अफ्रीका में रणनीतिक धान अनुसंधान का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने अब तक 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं का संचालन किया है और उनके 150 से अधिक वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

डॉ. सिंह ने 'इरावती' नामक धान की किस्म के विकास और 'सीड्स विदाउट बॉर्डर्स' जैसी वैश्विक पहलों के माध्यम से कृषि जगत में अमिट छाप छोड़ी है। वर्ष 2025 में उन्हें इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी फेलो अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। इस गरिमामयी अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ और कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने डॉ. सिंह के इस अंतरराष्ट्रीय योगदान की सराहना की और इसे उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।

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