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मशीनकॉन GCC समिट: गोवा में दिखा यूपी का दम, वैश्विक कंपनियों ने दिखाई रूचि

उत्तर प्रदेश ने गोवा में आयोजित 'मशीनकॉन GCC समिट 2026' में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए खुद को देश के सबसे आकर्षक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) हब के रूप में पेश किया। समिट में देश-विदेश के जीसीसी प्रमुखों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के समक्ष राज्य के तैयार इकोसिस्टम का रोडमैप साझा किया गया।

समिट में मुख्य वक्तव्य देते हुए *अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार* ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज सुशासन और तीव्र इंफ्रास्ट्रक्चर के बल पर अभूतपूर्व आर्थिक बदलाव का साक्षी बन रहा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश जीसीसी नीति 2024 को देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों में से एक बताते हुए कहा कि यह नीति कंपनियों को स्थापना से लेकर विस्तार तक हर चरण में सहयोग प्रदान करती है।

नीतियों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत निवेशकों को 25 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, परिचालन व्यय सहायता, भूमि प्रोत्साहन, पेरोल सहायता तथा स्टाम्प शुल्क में भारी छूट जैसे प्रावधान उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा, नई बिजनेस पार्क्स नीति के माध्यम से सरकार और डेवलपर्स मिलकर विश्वस्तरीय वर्कस्पेस तैयार कर रहे हैं। वर्तमान में नोएडा ज्ञान-आधारित उद्योगों का गढ़ बन चुका है, जबकि लखनऊ और कानपुर नए तकनीकी केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।

*प्रतिभा और AI बनेंगे अगली विकास यात्रा के आधार*
टैलेंट ऐज़ ए ग्रोथ लीवर” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में *आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार* ने राज्य की प्रतिभा क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में 8,000 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थान हैं, जिनमें IIT कानपुर, IIT BHU, IIIT और IIM लखनऊ जैसे प्रतिष्ठित केंद्र शामिल हैं। राज्य हर वर्ष 2 लाख से अधिक STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स) स्नातक तैयार करता है, जो वैश्विक कंपनियों को कुशल वर्कफोर्स प्रदान करते हैं।


तकनीकी भविष्य को लेकर उन्होंने राज्य सरकार के ₹225 करोड़ के AI मिशन और IIT कानपुर व IIIT लखनऊ में प्रस्तावित डीप-टेक हब्स की जानकारी दी, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और क्वांटम टेक्नोलॉजी में राज्य को अग्रणी बनाएंगे।

अधिकारियों ने जेवर (नोएडा) इंटरनेशनल एयरपोर्ट, व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क और 'निवेश मित्र' सिंगल-विंडो प्रणाली का उल्लेख करते हुए भरोसा जताया कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापारिक सुगमता के चलते उत्तर प्रदेश भारत की अगली डिजिटल और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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