2026 में मनाए जाने वाले 77वें गणतंत्र दिवस के लिए भारत ने दो प्रमुख विश्व नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। जिनमें एक यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट 'एंटोनियो कोस्टा' दूसरी यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट 'उर्सुला वॉन डेर लेयेन' हैं। ये दोनों मुख्य अतिथि 25 से 27 जनवरी, 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे।
भारत में 26 जनवरी को मुख्य अतिथि आमंत्रित करने की परंपरा 1950 में शुरू हुई थी। मुख्य अतिथि का चयन भारत की विदेश नीति, द्विपक्षीय संबंधों, और वैश्विक रणनीतिक महत्व के आधार पर किया जाता है। यह मेहमान देश के साथ सहयोग को बढ़ाने और आपसी संबंधों को मजबूत करने का प्रतीक होता है।
>> विदेशी मेहमानों की क्या होती है भूमिका? <<
किसी विदेशी नेता को भारत का गणतंत्र दिवस का चीफ गेस्ट बनाना उनके लिए सर्वोच्च सम्मान है। वे सभी सेरेमनी में मौजूद रहते हैं, उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है और राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर मिलता है। राष्ट्रपति उनके सम्मान में विशेष रिसेप्शन आयोजित करते हैं। चीफ गेस्ट राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को राजघाट पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री समेत कई नेता उनसे मुलाकात करते हैं। इस सम्मान के लिए किसी वर्ल्ड लीडर का चयन एक लंबी प्रक्रिया के बाद होता है, जो इस भूमिका को और भी खास बनाता है।
>> गणतंत्र दिवस के लिए चीफ गेस्ट चुनने की प्रक्रिया <<
गणतंत्र दिवस के लिए चीफ गेस्ट चुनने की प्रक्रिया आयोजन से 6 महीने पहले शुरू होती है। इस प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। भारत के पूर्व एंबेसडर मानबीर सिंह के अनुसार, चीफ गेस्ट का चयन करते समय भारत और उस देश के बीच संबंधों का विश्लेषण किया जाता है। विशेष रूप से, उस देश की सेना, राजनीति, और अर्थव्यवस्था के साथ भारत का कनेक्शन कैसा है, यह महत्वपूर्ण होता है।
इन सभी बिंदुओं पर गंभीर विचार करने के बाद ही नाम तय होता है। अंततः विदेश मंत्रालय इस निर्णय पर अपनी मुहर लगाता है। इस चयन प्रक्रिया को बेहद खास और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है

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