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रजत जयंती वर्ष में मुख्यमंत्री उत्तराखंड द्वारा लखनऊ महापौर को दिया गया पर्वत गौरव सम्मान


 पर्वतीय महापरिषद द्वारा आयोजित 15 दिवसीय पौराणिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक उत्तरायणी कैथिग मेला 2026 का रजत जयंती वर्ष समारोह इस वर्ष विशेष भव्यता और गरिमा के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की उपस्थिति ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। यह मेला उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक है, जो वर्षों से पर्वतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता आ रहा है।


बुधवार को आयोजित मुख्य समारोह में लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल जी को 'पर्वत गौरव सम्मान' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा प्रदान किया गया। इससे पूर्व यह प्रतिष्ठित सम्मान उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को दिया जा चुका है।

सम्मान प्राप्त करने के पश्चात महापौर सुषमा खर्कवाल जी ने कहा कि “उत्तरायणी कैथिग मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत का गौरव है। पर्वतीय समाज ने अपनी परंपराओं को जिस जीवंतता के साथ सहेजा है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरे पर्वतीय समाज और उसकी सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी ने अपने संबोधन में कहा कि “उत्तरायणी कैथिग मेला उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा हुआ आयोजन है। रजत जयंती वर्ष में यह मेला हमारी लोकसंस्कृति, लोककला और सामाजिक एकता को देश-प्रदेश के सामने प्रस्तुत कर रहा है। पर्वतीय महापरिषद का यह प्रयास सराहनीय है, जो संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी से जोड़ने का कार्य कर रहा है।”


इस अवसर पर माननीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निजी सचिव के.पी. सिंह, प्रदेश महामंत्री युवा मोर्चा दीपेंद्र कोश्यारी जी, पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी, महासचिव महेंद्र सिंह रावत जी, मुख्य संयोजक टी.एस. मनराल जी, संयोजक के.एन. चंदोला जी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहन सिंह मोना जी, संरक्षक लाबीर सिंह जी, क्षेत्रीय पार्षद प्रमोद राजन जी, मंडल अध्यक्ष भाजपा नरेंद्र देवड़ी जी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं जनसमुदाय उपस्थित रहा।

रजत जयंती वर्ष का यह आयोजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोककला और सामाजिक एकता को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। जनसहभागिता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। आयोजकों ने सभी आगंतुकों और सहभागी जनों का आभार व्यक्त करते हुए संस्कृति संरक्षण का संकल्प दोहराया।

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