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बुद्ध धातु शोभा यात्रा' बनी भारत-थाई सांस्कृतिक सेतु का प्रतीक, दोनों देशों के संबंध हुए और प्रगाढ़- जयवीर सिंह

भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में मंगलवार को आस्था और बौद्ध संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। थाई मोनेस्ट्री कुशीनगर की ओर से आयोजित पांच दिवसीय (20 से 24 फरवरी) समारोह के अंतिम दिन 17वीं पवित्र 'बुद्ध धातु शोभा यात्रा' हाथी-घोड़े और गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। शोभायात्रा से संपूर्ण बुद्ध स्थली धम्ममय हो उठी। विशेषकर थाईलैंड से पहुंचे बौद्ध श्रद्धालुओं, भिक्षुओं और पर्यटकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

समारोह में मुख्य अतिथि महाराज यतींद्र मोहन प्रताप मिश्रा तथा थाई राजदूत चवानाथ थानसून फांट की गरिमामय उपस्थिति के बीच थाईलैंड से आए बौद्ध भिक्षुओं ने बुद्ध वंदना की। मंगलवार सुबह शोभायात्रा महापरिनिर्वाण मंदिर से निकली, जो रामाभार स्तूप में पूजन-वंदन के बाद संपन्न हुई। थाई बौद्ध धर्म गुरु फ्रा था थेप बोधियोंग और थाई मंदिर के प्रमुख भिक्षु फ्राविडेश्चेरियन (डॉ. पी सोम पोंग) की देखरेख में विशेष पूजा-अर्चना की गई। शोभायात्रा में थाईलैंड के अलावा नेपाल, तिब्बत, उत्तर प्रदेश, लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे बौद्ध धर्मावलंबियों की गरिमामय उपस्थिति रही। हजारों स्थानीय के साथ 200 से अधिक विदेशी बौद्ध श्रद्धालु पवित्र यात्रा का हिस्सा बने।


*भारत-थाईलैंड मैत्री को कर रहा प्रगाढ़- मंत्री
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'बुद्ध धातु शोभा यात्रा जैसे आयोजन भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और सहयोग को भी नई ऊंचाई प्रदान करते हैं। भारत और थाईलैंड के बीच मैत्री संबंध इन आयोजनों के माध्यम से निरंतर प्रगाढ़ हो रहे हैं।'

*थाई कलाकारों ने किया मंत्रमुग्ध*
थाईलैंड से कुशीनगर पधारे लगभग 50 कलाकारों ने पारंपरिक 'सोम पोथा फ्रा धात' नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। थाई कलाकारों की सुसज्जित पारंपरिक वेशभूषा, सौम्य भाव-भंगिमाएं और लयबद्ध प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर भारत और थाईलैंड सहित विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं एवं उपासकों की उपस्थिति ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक एकता का स्वरूप प्रदान किया।


*सुसज्जित पालकी, वाद्ययंत्रों की धुनों से दिव्य माहौल*
'बुद्ध धातु शोभा यात्रा' के अंतिम दिन कुशीनगर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा। नगर के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए शोभायात्रा को भव्य स्वरूप प्रदान किया। आकर्षक ढंग से सुसज्जित पालकी, कतारबद्ध श्रद्धालुओं की उपस्थिति और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने पूरे वातावरण को एक दिव्य उत्सव में परिवर्तित कर दिया।

*पांच दिनों तक विभिन्न कार्यक्रम*
'बुद्ध धातु शोभा यात्रा' के दौरान पांच दिनों तक विभिन्न प्रतियोगिताएं और रचनात्मक कार्यक्रम हुए। भगवान बुद्ध के उपदेशों एवं करुणा संदेश पर आधारित गायन प्रतियोगिता, चित्रकला एवं रंग भरने की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके अतिरिक्त, मंत्रोच्चार, भिक्षादान, निःशुल्क चिकित्सा शिविर आदि का आयोजन किया गया। शोभायात्रा समाप्ति से पूर्व विभिन्न प्रतियोगिताएं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।


*'वर्ष 2025 में रिकॉर्ड विदेशी पर्यटक पहुंचे बौद्ध सर्किट'*
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'भगवान बुद्ध की करुणा, शांति और वैश्विक सद्भाव का संदेश आज भी दुनिया भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की पावन धरा की ओर आकर्षित कर रहा है। प्रदेश का बौद्ध सर्किट न केवल घरेलू बल्कि बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए भी आस्था और अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश के सभी छह प्रमुख बौद्ध स्थलों- कुशीनगर, कौशांबी, संकिसा, श्रावस्ती, कपिलवस्तु और सारनाथ में 4.42 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन इसी बात का प्रमाण है। राज्य पर्यटन विभाग दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं को अपनी 'बोधि यात्रा' की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने को आमंत्रित करता है।

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