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खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में उत्तर प्रदेश अग्रणी, PMFME योजना में देश में शीर्ष पर उत्तर प्रदेश

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कुशल मार्गदर्शन मे उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग तेजी से एक प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है। यूपी की खाद्य प्रसंस्करण नीति से निवेश, रोजगार और निर्यात को नई रफ्तार मिल रही है।प्रदेश सरकार द्वारा लागू उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 का उद्देश्य राज्य में निवेश, रोजगार और निर्यात को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। उप मुख्यमंत्री के नेतृत्व व निर्देशन मे खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र मे सुदृढ़ नीति एवं पारदर्शी व्यवस्था के साथ आगे बढ़ रहा है।

कृषि उत्पादन आयुक्त, उ०प्र० शासन दीपक कुमार की अध्यक्षता में  मंगलवार को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अन्तर्गत गठित राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एस.एल.ई.सी.) की  19वीं बैठक वर्चुअल माध्यम से आईआईडीसी, इन्वेस्ट यूपी हॉल, गोमतीनगर, लखनऊ में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों की प्रगति, नई परियोजनाओं के अनुमोदन तथा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बी एल मीणा द्वारा 
बताया गया कि 21 मई 2026 तक पोर्टल पर कुल 1745 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 521 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करते हुए लेटर ऑफ कम्फर्ट (LOC) जारी किए जा चुके हैं। वर्तमान में 20 नए प्रस्ताव समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किए गए।
वित्तीय एवं भौतिक प्रगति की समीक्षा के दौरान अवगत कराया गया कि वर्ष 2023-24 से अब तक कुल 521 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है तथा 307.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। बैठक में वर्ष 2026-27 के दौरान 1 अप्रैल 2026 से 25 मई 2026 तक 28.45 करोड़ रुपये की सब्सिडी हस्तांतरित किए जाने की जानकारी भी दी गई।

समिति के समक्ष प्रस्तुत 20 नए प्रस्तावों में कानपुर देहात स्थित गुड ड्रॉप वाइन सेलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा केले से निर्मित कार्बोनेटेड वाइन, हाथरस में कुट्टू एवं सौंफ प्रसंस्करण, मुजफ्फरनगर के जैगरी आधारित उत्पाद तथा बिजनौर से जूस, बेवरेज एवं अन्य बेकरी एवं कन्फेक्शनरी उत्पादों हेतु फ्रक्टोज शुगर निर्माण जैसी परियोजनाएं प्रमुख रूप से शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त फ्रोजन फूड, आरटीई स्नैक्स, बेकरी उत्पाद, काजू प्रोसेसिंग एवं अन्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों से संबंधित प्रस्तावों पर भी विचार किया गया।  प्रस्तुत नए प्रस्तावों में फ्रोजन फूड, आरटीई स्नैक्स, बेकरी उत्पाद, काजू प्रोसेसिंग, आइसक्रीम विस्तार, गुड़ आधारित उत्पाद, मसाला एवं अनाज प्रसंस्करण सहित विभिन्न खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की परियोजनाएं शामिल रहीं।

कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार द्वारा बैठक में निर्देशित किया गया कि जिन जनपदों से खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों से संबंधित परियोजना प्रस्ताव प्राप्त नहीं हो रहे हैं, वहां के जिलाधिकारियों को पत्र प्रेषित कर योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं निवेशकों को प्रोत्साहित करने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे प्रदेश के सभी जनपदों में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा मिल सके।

बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उत्तर प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऋण वितरण के आधार पर देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बताया गया।इसके अतिरिक्त, विभिन्न थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों (TPIA) की प्रगति की समीक्षा करते हुए निरीक्षण कार्यों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।

बैठक के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुख्यमंत्री उद्यमी मित्र, एटा के श्री गौरव सचान, कानपुर देहात के नवनीत कुमार एवं बाराबंकी के एफ. रहमान अंसारी को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन एवं उद्योग स्थापना में उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की प्रो. दिव्या रानी सिंह को उत्कृष्ट थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी (TPIA) कार्य हेतु तथा डॉ. अरविंद कुमार सिंह, सेवानिवृत्त अपर निदेशक, पशुपालन विभाग को उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

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