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छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृतियों को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम

 

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण एवं विकास के उद्देश्य से शुक्रवार को मुंबई प्रवास के दौरान महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार से उनके मालाबार स्थित आवास पर शिष्टाचार भेंट कर विस्तृत चर्चा की।


बैठक में योगेन्द्र उपाध्याय ने आगरा स्थित कोठी मीना बाजार को छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों के अन्वेषण तथा जयपुर राजपरिवार के राजस्व अभिलेखों के अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि मिर्जा राजा जयसिंह के पुत्र रामसिंह के आवासीय परिसर में ही औरंगजेब ने छलपूर्वक छत्रपति शिवाजी महाराज एवं उनके पुत्र को नजरबंद किया था। उन्होंने कहा कि अपनी अद्वितीय रणनीति, साहस और बुद्धिमत्ता के बल पर शिवाजी महाराज ने वहां से निकलकर भारतीय इतिहास में अदम्य पराक्रम का उदाहरण प्रस्तुत किया।


उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 से उन्होंने इतिहासकार प्रो. सुगम आनंद तथा स्वर्गीय डॉ. अमि आधार निडर के साथ ऐतिहासिक शोध एवं अभिलेखों के आधार पर इस स्थल की पहचान स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए। इन प्रयासों से यह तथ्य पुष्ट हुआ कि आगरा की कोठी मीना बाजार ही वह स्थान है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज को नजरबंद रखा गया था।



योगेन्द्र उपाध्याय ने महाराष्ट्र के संस्कृति मंत्री आशीष शेलार को आगरा आने का आमंत्रण देते हुए आग्रह किया कि वे इस ऐतिहासिक स्थल का निरीक्षण करें, ताकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के समन्वय से इसके संरक्षण, विकास तथा भव्य स्मारक निर्माण की रूपरेखा तैयार की जा सके। उन्होंने कहा कि यह स्मारक केवल शिवाजी महाराज के शौर्य का प्रतीक ही नहीं होगा, बल्कि महाराष्ट्र और उत्तर भारत के सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने वाला प्रेरणास्थल भी बनेगा।


बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के संवर्धन पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। इस अवसर पर महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता सुनील सिंह भी उपस्थित रहे। आशीष शेलार ने योगेन्द्र उपाध्याय को उन 12 ऐतिहासिक किलों पर आधारित पुस्तक भी भेंट की, जिन्हें हाल ही में यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।


उच्च शिक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से आगरा स्थित यह ऐतिहासिक स्थल राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्राप्त करेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, साहस और सांस्कृतिक एकता की प्रेरणा देता रहेगा।


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