उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार का स्पष्ट लक्ष्य उत्तर प्रदेश को फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित करना है। किसानों, युवाओं, महिला स्वयं सहायता समूहों और उद्यमियों—सभी को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। इस प्रकार के आयोजनों से निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसरों के द्वार खुलते हैं।
इस अवसर पर नीरज बोरा जी, विधायक, लखनऊ, प्रमुख सचिव खाद्य प्रसंस्करण, बीएल मीणा जी, दिनेश गोयल राष्ट्रीय अध्यक्ष, आलोक अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दीपक कुमार बजाज महासचिव, अवधेश अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, चेतन देव भल्ला, चेयरमैन इंडिया फूड एक्सपो, सूर्य प्रकाश हवेलिया, कन्वीनर इंडिया फूड एक्सपो विकास खन्ना को चेयरमैन इंडिया फूड एक्सपो एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, उद्यमी और बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।
मौर्य जी ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा आयोजित इण्डिया फूड एक्सप्रो एवं सेमिनार में उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया, विभिन्न स्टॉलों पर जाकर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े नवाचारों की जानकारी ली तथा सेमिनार में प्रतिभाग कर मीडिया को संबोधित किया।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इण्डिया फूड एक्सप्रो जैसे आयोजन प्रदेश के किसानों, उद्यमियों और निवेशकों को एक साझा मंच प्रदान करते हैं। उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। यह एक्सपो विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति–2023 को निवेशकों के अनुकूल बनाया गया है, जिससे कृषि और उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु स्थापित हुआ है। नीति के अंतर्गत भूमि खरीद, स्टाम्प शुल्क, मंडी शुल्क, बाह्य विकास शुल्क एवं भूमि उपयोग परिवर्तन में व्यापक छूट प्रदान की जा रही है। संयंत्र, मशीनरी एवं तकनीकी सिविल कार्यों पर 35 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि कोल्ड चेन, वैल्यू एडिशन, रीफर वाहन, सोलर ऊर्जा एवं नियंत्रित परिवहन को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए एकीकृत बाजार क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। अब तक नीति के अंतर्गत 1481 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 426 इकाइयों को स्वीकृति दी जा चुकी है। 289 परियोजनाओं को 387 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि हस्तांतरित की गई है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिला है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (PMFME) योजना असंगठित खाद्य उद्योगों को संगठित और आधुनिक बनाने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस योजना के अंतर्गत सूक्ष्म इकाइयों को 35 प्रतिशत तक क्रेडिट लिंक्ड अनुदान, स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ एवं सहकारिताओं को कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रांडिंग में सहायता दी जा रही है। एक जनपद–एक उत्पाद और क्लस्टर आधारित विकास पर विशेष फोकस किया गया है।
उन्होंने बताया कि PMFME योजना के अंतर्गत प्रदेश में 21,000 से अधिक इकाइयों को ऋण स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्ष 2025–26 में 5101 उद्यमियों को ऋण देकर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है तथा 246 करोड़ रुपये की अनुदान राशि वितरित की गई है।
उप मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि 14 जनपदों में कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को संचालन में प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। कुकरी, बेकरी एवं कन्फेक्शनरी में विशेष दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण उपरांत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्थापना पर 50 प्रतिशत तक (₹1 लाख तक) अनुदान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं ग्रामीण युवाओं के लिए विशेष अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अब तक 225 दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं तथा कुकरी (पाक कला) में 09 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।
प्रधानमंत्री जी द्वारा सशक्त उत्तर प्रदेश
• उत्तर प्रदेश में अब तक हजारों सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। योजना के तहत "एक जनपद-एक उत्पाद" (ODP) के माध्यम से स्थानीय उत्पादों जैसे—सिद्धार्थनगर का काला नमक चावल, प्रयागराज का अमरूद और वाराणसी की मिर्च—को वैश्विक पहचान दिलाई जा रही है।
• बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी विशेष फंड में 35% की वृद्धि की गई है.
• नई इकाइयों की स्थापना के लिए 35% तक की क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी प्रदान करना।
• कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर और कोल्ड चेन सुविधाओं का विस्तार करना।
• स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को बीज पूंजी (Seed Capital) उपलब्ध कराना।
• उत्तर प्रदेश के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की मांग अब विदेशों में तेजी से बढ़ रही है।
• गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक पैकेजिंग की मदद से राज्य के उत्पादों का निर्यात यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ा है।
• सरकार द्वारा निर्यातकों को दी जाने वाली लॉजिस्टिक सहायता और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी से स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक मंच प्राप्त हो रहा है।
अंत में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार हर निवेशक और उद्यमी के साथ मजबूती से खड़ी है। इण्डिया फूड एक्सप्रो एवं सेमिनार जैसे आयोजन उत्तर प्रदेश को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



