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महिला दिवस पर लखनऊ में ‘प्रगति 2026 - आत्मसम्मान से समानता तक’ बाल उत्सव का आयोजन

योगी सरकार की पहल पर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ के दयाल गेटवे, गोमती नगर में बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा बालिकाओं के आत्मसम्मान, समानता और सशक्तिकरण को समर्पित कार्यक्रम “प्रगति: आत्मसम्मान से समानता तक – बाल उत्सव” का  आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने दीप प्रज्वलन कर किया। इसके साथ ही कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा तैयार की गई कॉमिक पुस्तकों, मीना मंच की पूर्व बालिकाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों से संबंधित केस स्टडी बुकलेट का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के प्रमुख जकारी ऐडम सहित शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस नारी शक्ति के सम्मान और उनके योगदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति के बिना इस संसार की कल्पना नहीं की जा सकती और यदि यह संसार आगे बढ़ रहा है तो उसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है वहीं देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब समाज में बेटियों को बेटों की तुलना में कम अवसर मिलते थे, लेकिन आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आज बेटियां शिक्षा, खेल, विज्ञान, प्रशासन और तकनीक जैसे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और कई प्रतियोगिताओं में शीर्ष स्थान प्राप्त कर रही हैं।


मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से 12वीं कक्षा तक उच्चीकृत किया जा रहा है ताकि बालिकाओं को आवासीय वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।बउन्होंने बताया कि प्रदेश के कुल 826 विकास खंडों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे हर क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकें।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार द्वारा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। डीबीटी के माध्यम से छात्रों को जूते, मोजे, स्कूल बैग, कॉपी और किताबों के लिए 1200 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे आर्थिक कारणों से किसी भी बच्चे की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले बच्चों की कुल संख्या 3 करोड़ 19 लाख 17 हजार से अधिक है, जिनमें 1 करोड़ 51 लाख 12 हजार बालिकाएं शामिल हैं। यह आंकड़ा प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।

मंत्री सिंह ने बच्चों को डिजिटल तकनीक के सकारात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। सरकार द्वारा विद्यालयों में टैबलेट और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। हालांकि उन्होंने बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया के अनावश्यक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग ज्ञान और सीखने के लिए होना चाहिए, न कि समय की बर्बादी के लिए।


अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।  उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि समाज में बढ़ती जागरूकता और सरकार की शिक्षा संबंधी नीतियों का परिणाम है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि स्कूल चलो अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश में कोई भी बच्चा या बच्ची स्कूल से बाहर न रहे। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं की विज्ञान और गणित जैसे STEM विषयों में भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि मीना मंच और अन्य शैक्षिक पहलें बालिकाओं को अपने विचार व्यक्त करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर देती हैं। उन्होंने कहा कि खेल, शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं।उन्होंने बालिकाओं को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने, तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने और अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

यूनिसेफ उत्तर प्रदेश के प्रमुख जकारी ऐडम ने कहा कि प्रगति कार्यक्रम बालिकाओं की क्षमता, रचनात्मकता और नेतृत्व का उत्सव है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे, विशेषकर लड़कियों को सीखने, आगे बढ़ने और नेतृत्व करने के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ उत्तर प्रदेश सरकार, शिक्षकों और समुदाय के साथ मिलकर समावेशी और लैंगिक संवेदनशील शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


कार्यक्रम की शुरुआत छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद बाल उत्सव से संबंधित जनपद और मंडल स्तर पर आयोजित गतिविधियों का एक वीडियो प्रदर्शित किया गया, जिसमें प्रदेश भर में बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों और उपलब्धियों की झलक दिखाई गई।

कार्यक्रम में बालिकाओं ने महिला सशक्तिकरण और आत्मसम्मान की थीम पर आधारित फ्लैश मॉब, नुक्कड़ नाटक, नृत्य, योग प्रदर्शन और माइम जैसी आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा, अधिकार और समान अवसरों का प्रभावी संदेश दिया गया।

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाली 23 प्रतिभाशाली बालिकाओं और पूर्व छात्राओं का सम्मान रहा। इनमें खेल, शिक्षा, नवाचार और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाली बालिकाएं शामिल रहीं। राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लगभग 850 बच्चे, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर 22 विषयगत स्टॉल लगाए गए, जिनमें शिक्षण-अधिगम सामग्री, रचनात्मक गतिविधियां, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम, नेतृत्व विकास, अभिभावक सहभागिता और करियर परामर्श से संबंधित प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई।

“प्रगति: आत्मसम्मान से समानता तक – बाल उत्सव” की शुरुआत वर्ष 2024 में एक पायलट परियोजना के रूप में की गई थी। इसकी सफलता के बाद वर्ष 2025-26 में इसे प्रदेश के सभी 75 जनपदों में विस्तारित किया गया। यह आयोजन तीन चरणों में संपन्न हुआ—पहले चरण में जनपद स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, दूसरे चरण में 18 मंडलों में मंडल स्तरीय बाल उत्सव हुए और अंततः राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रतिभाओं को भाग लेने का अवसर मिला।


दोपहर के सत्र में अभिभावकों का सम्मान, गीत प्रस्तुति, पूर्व छात्र-छात्राओं के साथ संवाद और बच्चों द्वारा अपने अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और सभी प्रतिभागियों ने बालिकाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

*8 मार्च, 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सम्मानित हुई बेटियां*

- भावना — केजीबीवी कुंदरकी, मुरादाबाद — हॉकी में प्रदेश टीम हेतु चयनित

- अनोखी — केजीबीवी मलिहाबाद, लखनऊ — फुटबॉल में प्रदेश टीम हेतु चयनित

- पायल पाल — केजीबीवी मलिहाबाद, लखनऊ — फुटबॉल में प्रदेश टीम हेतु चयनित

- शिखा गंगवार — केजीबीवी भोजीपुरा, बरेली — ताइक्वांडो में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक विजेता

- नेहा सागर — फतेहगंज, बरेली — ताइक्वांडो में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- वंशिका यादव — केजीबीवी बरेली नगर क्षेत्र, बरेली — ताइक्वांडो में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- सोनी — केजीबीवी बुलन्दशहर नगर क्षेत्र, बुलन्दशहर — थांगता में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- प्राची — केजीबीवी बुलन्दशहर नगर क्षेत्र, बुलन्दशहर — थांगता में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- प्रियांशी — केजीबीवी लखावटी, बुलन्दशहर — थांगता में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- तमन्ना — केजीबीवी अनूपशहर, बुलन्दशहर — थांगता में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- लाली — केजीबीवी गंज मुरादाबाद, उन्नाव — क्रिकेट में प्रदेश टीम हेतु चयनित

- शेख राफिया — केजीबीवी गंज मुरादाबाद, उन्नाव — क्रिकेट में प्रदेश टीम हेतु चयनित

- सोनाली भारती — केजीबीवी भटहट, गोरखपुर — ताइक्वांडो में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता

- मुस्कान बघेल — केजीबीवी अतरौली, अलीगढ़ — राज्य स्तर पर कबड्डी टीम में चयन

- कुंजल सरोज — केजीबीवी सेवापुरी, वाराणसी — शैक्षणिक भ्रमण हेतु वर्ष 2023 में इसरो के लिये चयनित

- छाया चौरसिया — केजीबीवी कोपागंज, मऊ — कक्षा 10 की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण

- गरिमा — केजीबीवी ठेकमा, आजमगढ़ — कक्षा 10 की परीक्षा में 95 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण

- शगुन विश्वकर्मा — केजीबीवी भदोही, भदोही — कक्षा 10 की परीक्षा में 80 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण

- महशर जहां — उच्च प्राथमिक विद्यालय नगली छोइया, हल्दौर (बिजनौर) — अपने गांव की पहली महिला जो स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इसके साथ ही अपने समुदाय में छोटी लड़कियों के लिए शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सरकारी परीक्षा की तैयारी भी कर रही हैं। आज भी समुदाय की गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं।

- शिवानी — कम्पोजिट स्कूल बराटा चिरगांव, बड़ागाँव, झांसी — समुदाय में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं अधिकार पर काम कर रही हैं।

- निधि वर्मा — यूपीएस कोटरा, लखीमपुर — शाहजहांपुर में नर्स के रूप में कार्यरत हैं।

- शाहीन — यूपीएस कुम्हरौरा, बाराबंकी — गांव की पहली महिला स्नातक बनीं। गांव छोड़ने के बजाय बच्चों, खासकर लड़कियों के अधिकारों पर कार्य करने का निर्णय लिया।

- रेखा सिंह — यूपीएस अटोंर, गाजियाबाद — अंडर-16 क्रिकेट में पहचान बनाई, राष्ट्रीय स्तर पर 2017 में खेलीं। रणजी ट्रॉफी में 2017 से 2024 तक 5 बार खेल चुकी हैं तथा वर्तमान में फिर से रणजी ट्रॉफी खेलने की तैयारी कर रही हैं। नेशनल क्रिकेट अकादमी और जोनल क्रिकेट अकादमी में 2019 में चयनित हुईं तथा मुंबई टीम नेट में 2024 में गेंदबाज के रूप में चयनित हुई हैं।


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय बाल उत्सव ‘प्रगति – आत्मसम्मान से समानता तक एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के दौरान विभिन्न विषयों पर आधारित 22 विशेष स्टॉल लगाए गए, जो पूरे आयोजन के प्रमुख आकर्षण बने। इन स्टॉलों के माध्यम से शिक्षा में नवाचार, जेंडर समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक-भावनात्मक अधिगम, अभिभावक सहभागिता और करियर मार्गदर्शन से जुड़े विविध आयामों को रोचक और गतिविधि आधारित रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम में लगाए गए स्टॉलों को चार प्रमुख जोनों में विभाजित किया गया था। पहले और दूसरे जोन में शिक्षक टीएलएम एवं कठपुतली अनुभाग के अंतर्गत शिक्षकों द्वारा तैयार की गई गतिविधि आधारित शिक्षण सामग्री और कठपुतली प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से जेंडर समानता, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार और जीवन कौशल जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। कन्नौज, शामली, सीतापुर, अयोध्या, रायबरेली, बाराबंकी, लखीमपुर, लखनऊ, मेरठ और अमेठी जैसे जनपदों के शिक्षकों द्वारा तैयार किए गए मॉडल और गतिविधियों ने बच्चों को ‘करके सीखने’ (Learning by Doing) की अवधारणा से जोड़ा।

इन स्टॉलों में विज्ञान नवाचार, प्रारंभिक साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल विकास, जेंडर-संवेदी शिक्षण सामग्री तथा कॉमिक बुक निर्माण जैसी गतिविधियां भी प्रदर्शित की गईं। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी पहलें शामिल रहीं।

तीसरे जोन में बच्चों के लिए सामाजिक-भावनात्मक अधिगम और नेतृत्व विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की गईं। यहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण संवाद मंच, दृश्य अधिगम गतिविधियाँ, रचनात्मक अभिव्यक्ति मंच, ओरिगामी कला केंद्र और नवाचार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में तार्किक सोच, आत्म-अभिव्यक्ति, सहानुभूति और रचनात्मकता विकसित करने का प्रयास किया गया।

चौथे जोन में अभिभावक सहभागिता एवं करियर परामर्श अनुभाग के अंतर्गत करियर परामर्श केंद्र, अभिभावक संवाद मंच, नेतृत्व क्षमता विकास गतिविधियां, बाल अधिकार जागरूकता मंच और बाल संसद जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं। इन स्टॉलों के माध्यम से बच्चों को उनके अधिकारों, भविष्य के करियर विकल्पों और नेतृत्व कौशल के बारे में जानकारी दी गई, वहीं अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास में अपनी भूमिका को समझने का अवसर मिला।

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